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धर्म/संस्कृति

वट सावित्री व्रत, मंदिरों में सुहागन महिलाओं की भीड़ अखंड सौभाग्य के लिए की वट वृक्ष की पूजा..

गीतू केसरवानी

:ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को वट सावित्री व्रत करने की परंपरा है. इस दिन शादीशुदा महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और वट के पेड़ की पूजा भी करती हैं. इस व्रत का महत्व करवा चौथ जैसा ही है.सावित्री व्रत सौभाग्य को देने वाला और संतान की प्राप्ति में सहायता देने वाला व्रत माना गया है। भारतीय संस्कृति में यह व्रत आदर्श नारीत्व का प्रतीक बन चुका है। स्कंद पुराण तथा भविष्योत्तर पुराण के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को यह व्रत करने का विधान है,

​वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती है। इस बार 19 मई को वट सावित्री का व्रत मनाया जा रहा है । इस दिन वट वृक्ष की विधिवत पूजा की जाती है। मना जाता है की वट सावित्री व्रत रखने से महिलाओं को सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
वट वृक्ष का पूजन और सावित्री-सत्यवान की कथा का स्मरण करने के विधान के कारण ही यह व्रत वट सावित्री के नाम से प्रसिद्ध हुआ। सावित्री भारतीय संस्कृति में ऐतिहासिक चरित्र माना जाता है। सावित्री का अर्थ वेद माता गायत्री और सरस्वती भी होता है। सावित्री का जन्म भी विशिष्ट परिस्थितियों में हुआ था।

आज हल्द्वानी में भी पटेल चौक में प्राचीन वटवृक्ष के नीचे सुहागन महिलाओं ने वट वृक्ष के नीचे अखंड सौभाग्य की कामना की आज सुबह से ही महिलाओं की काफी भीड़ नजर आई, भीड़ को देखते ही महिलाओं में इस व्रत को लेकर काफी उत्साह दिखा करवा चौथ की इस व्रत को भी निर्जला व्रत के रूप में मनाया जाता है, जहाँ आज उत्तराखंड के पारंपरिक परिधान को पहने सुहागन महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य के लिए वट वृक्ष के समक्ष अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए पूजा अर्चना की !

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